Jun 29, 2011

Desi Erotic Story : औरत की प्यास

औरत की प्यास

प्रेषक : दीवाना चूत का

मैं एक २५ साल की खुबसूरत एंड सेक्सी औरत हूँ. मेरा हसबंड मुझ से पॉँच साल बड़ा है और वो एक उद्योगपति है वो एक कम पागल आदमी है और हम एक दूसरे के साथ बहुत कम मिल पाते हैं. हमारा अभी तक कोई भी बच्चा नहीं हुआ है. शुरू के दो तीन साल में हम लोगों की सेक्स लाइफ बहुत ही अच्छी थी. उसके बाद वो काम के चक्कर में बहुत फँस गया और हम ने किट्टी पार्टी और लेडीज पार्टी जों कर ली. इन किट्टी पार्टी और लेडीज पार्टी में सिर्फ़ शराब, ब्लू फ़िल्म चलती और औरतों में चूत चूमना और चूत चाटना होती थी. मैं इसमे बहुत खुश थी.

एक बार होली पर मेरा पति अपने काम से बाहर गया हुआ था. मैं लेडीज ' किट्टी पार्टी में चली गई. उस दिन किट्टी पार्टी में बहुत शराब पी गई और हम लोग ताश भी खेले. फिर हम औरतों ने एक हिन्दी पोर्नो फ़िल्म भी देखी, जो की बहुत ही गरम थी. उस के बाद हम औरतों ने चुम्मा और चूत चाटी भी की, और यह सब रात के तीन बजे तक चलता रहा. हम ने बहुत शराब पी ली थी और हमें घर तक हमारी एक सहेली अपनी कार में छोड़ गयी.

घर पर मेरा भाई, रमेश ने सहारा दे कर मुझे मेरे बेडरूम तक पहुचाया. मैंने इतनी शराब पी रखी थी कि मैं ठीक तरह से चल भी नहीं पा रही थी. आज मैं किट्टी पार्टी में गरम सिनेमा देख कर बहुत ही गरम हो गई थी. मेरी चुन्ची बहुत फड़क रही थी और मेरी चूत से पानी निकल रहा था जिस से कि मेरी पैंटी तक भीग गयी थी. जैसे ही मेरे भाई ने मुझ को सहारा देकर मेरे बेडरूम तक ले आया मेरा मन उसी से चूत चुदवाने का हो उठा. मेरी चूत फड़क उठी.

मेरा भाई, रमेश एक २० साल का हट्टा कट्टा नौजवान है. मैं अपने बेडरूम में आ कर एक कुर्सी पर बैठ गयी और जान बूझ कर अपना पल्लू गिरा दिया, जिसे कि रमेश मेरी चूचियां को देख सके. मैंने उस दिन एक बहुत ही छोटा ब्लाउज पहन रखा था और उसका गला बहुत ही लो कट था.

रमेश का लंड मेरी चुन्ची देख कर धीरे धीरे खड़ा होने लगा और उसको देख कर मैं और पागल हो गयी. मुझे लगा कि मेरा प्लान काम कर रहा है. उसका पैंट तम्बू के तरह तनने लगा मैं धीरे से मुस्कुराई. मैं ने हाथ से अपने बाल पीछे किए. मैं जान बूझ कर उसको अपनी चुन्ची की झलक दिखाना चाहती थी. मैंने अपने कन्धों को और पीछे ले गई जिस से से की मेरी चुन्ची और बाहर की तरफ़ निकल गई. उसकी पैंट और उठने लगी और मै मन ही मन मुस्करा रही थी और सोच रही थी कि मेरा काम बन जाएगा. उसके लंड की उठान को देख कर लग रहा था कि थोडी ही देर में मैं उसकी बाँहों में घुस जाउंगी और उसका लंड मेरी चूत अच्छी तरह से कस कर चोदेगा.

मैंने अपने भाई से बोला कि जाओ "दो ग्लास और सकोच की बोतल हमारे कमरे से ले आओ". मैंने रमेश से बोला इसको ले लो और पी जाओ. उसने हमारी तरफ़ पहले देखा और एक ही झटके में सारी शराब पी गया. मै ने भी अपना ग्लास खाली कर दिया. मैंने उसकी आँखों में झांकते हुए धीरे से अपने ब्लाउज को उतार दिया. मैंने उसकी आँखों में वासना के डोरे देखे और रमेश मुझे घूर रहा था.

मै उसकी पैंट की तरफ़ देख रही थी, जो अब तक बहुत ही फूल चुकी थी. मै समझ गयी की उसका लंड अब बिल्कुल ही खड़ा हो गया है और चोदने के लिए अब तैयार है. वो मेरे आधे नंगे जिस्म को बहुत अच्छी तरह से देख रहा था. मै उस से पूछा, "क्यों रमेश, "क्या सोच रहे हो .तुम्हारे साथ क्या होने वाला है ?" वो कुछ ना बोल सका और बहुत ही घबरा गया. मैंने धीरे से उस से पूछा, "तुम्हारा लंड खड़ा हो गया है, है न ?" "मुझे पता है तुम भी मेरी चूत में अपना लंड घुसना चाहते हो ".

मेरे जबान से इतनी गन्दी बात निकलते ही मेरी चूत और गरमा गयी और ढेर सारा पानी निकला. मेरी चूत उसके लंड खाने के लिए फड़फड़ाने लगी. मेरे दिमाग में बस एक ही बात घूम रही थी, की कब रमेश का लंड मेरी चूत में घुसेगा और मुझे जोर जोर से चोदेगा. मै अपने कपडों को धीरे धीरे से खोलने लगी और यह देख कर रमेश की आँखें बाहर निकलने लगी. मैंने धीरे से अपनी साडी को उतारी. मैंने अपना पेटीकोट भी धीरे से उतार फेंका और फिर पैंटी भी उतार फेंकी. अब मै अपने भाई, रमेश के सामने बिल्कुल नंगी हो कर खड़ी हो गयी. रमेश मुझको फ़टी आँखों से देख रहा था. मेरी बाल सफा, भीगी चूत उसकी आँखों के सामने थी और वो उसके लंड को लीलने के लिए बेताब हो रही थी.

मैंने रमेश से धीरे से पूछा, "ओह रमेश ? कब तक देखते रहोगे ? आओ मेरे पास आओ, और मुझे चोदो. देख नही रहे हो मै कब से अपनी चूत खोले चुदासी खड़ी हूँ. आओ पास आओ और अपने मोटे लंड से मेरी चूत को खूब अच्छी तरह से रगड़ कर चोदो ." मेरी इस बात को सुन कर वो हरकत में आ गया. वो मेरे सामने अपने कपड़े उतारने लगा. उसने पहले अपना शर्ट उतरा. फिर उसने अपनी चड्डी भी धीरे से उतार फेंकी. चड्डी उतारते ही उसका लंड मेरी आंखों के सामने आ गया. उसका लंड इस समय बिल्कुल खड़ा था और चोदने को बेताब हो कर झूम रहा था. मैं उसके लंड को बड़ी बड़ी अआँखों से घूर रही थी. उसका लंड मेरे पति के लंड से ज्यादा बड़ा और मोटा था. मैं उसका लंड देख कर घबरा गयी, लेकिन मेरी चूत उसके लंड को खाने के लिए फड़फड़ाने लगी. मैं अपनी कुर्सी से उठ कर उसके पास जाने लगी, लेकिन मेरे पैर लड़खड़ा गए. मैं गिरने लगी और रमेश ने आकर मुझको चिपटा कर संभाल लिया .

एक झटके में रमेश का हाथ मेरी चुन्ची पर था. वो मेरी एक चुन्ची को अपने मुंह के अन्दर लेकर चूसने लगा. मैं बहुत शराब पीने के कारण खड़ी नहीं हो पा रही थी. मैं फर्श पर गिर पड़ी. रमेश ने मुझको फट से पकड़ लिया और हम दोनों कारपेट पर गिर गए. रमेश का हाथ मेरी चुन्ची पर था और रमेश वैसे ही पड़ा रहा. अब मुझ से बर्दास्त नहीं हो रहा था मैने धीरे से रमेश से कहा, "रमेश मेरी चुन्ची तो दबाओ, खूब जोर से दबाओ, इनको अपने मुंह में लेके चूसो, इनसे खूब खेलो".

इतना सुनते ही रमेश मेरे ऊपर टूट पड़ा और मेरे चूंची से खिलवाड़ करने लगा. मैंने अपना दाहिना तरफ़ का दूध उसके मुंह पर लगा दिया और कहा लो इसे अपने मुंह में लेके खूब जोर से चूसो. रमेश मेरे दूध को लेकर चूसने लगा. मै अपनी कामवासना में पागल हो रही थी. मेरी चूत से पानी निकल रहा था. रमेश मेरी दोनों चूंची को बारी बारी से मसल रहा था और चूस रहा था. मैं उसकी दूध चुसाई से पागल सी हो गयी और उसका एक हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर ले गयी.

मेरी चूत को छूते ही रमेश ने पहले मेरी झांटों पर हाथ फिराया और अपनी बीच वाली उंगली को मेरी चूत में घुसा दिया. रमेश अब मुझ को अपनी उंगली से चोद रहा था. अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था, और मै अपने दोनों हाथों से रमेश का लंड पकड़ लिया और उसको मसलने लगी. रमेश के मुंह से सी ! सी ई ! की आवाज निकल रही थी. मैंने रमेश का लंड पकड़ कर उसका सुपारा निकाल लिया और उस पर एक चुम्मा जड़ दिया. रमेश अब जोर जोर से मुझे अपनी उंगली से चोद रहा था.

मैं रमेश का लंड अपने मुंह में ले के चूसने लगी और रमेश अपने लंड को मेरे मुंह में जोर जोर से ठेलने लगा. थोडी देर के बाद मुझको लगा कि रमेश अब झड़ जायगा और मैं बोली रमेश "चोद ! चोद ! अपनी दीदी के मुंह को खूब जोर जोर से चोद और अपना माल अपनी दीदी के मुंह में गिरा दे. थोडी देर के बाद रमेश बोला हई दीदी मैं झड़ रहा हूँ और उसने अपना सारा माल मेरे मुंह में डाल दिया. मैंने रमेश के लंड का माल पूरा का पूरा पी लिया.

मैंने धीरे से रमेश से पूछा "अपनी दीदी को चोदेगा ? तेरे जीजा की बहुत याद आ रही है. मेरी चूत बहुत प्यासी हो रखी है. रमेश ने मेरे दोनों चूंचीयों को पकड़ कर बोला "दीदी अपनी चूत पिलाओ न. पहले दीदी की चूत चूसूंगा फिर जी भर के चोदूंगा. मैं रमेश का लंड अपने हाथों में पकड़ कर खेल रही थी और मैं कही "तेरा लंड तो बहुत विशाल है रे ". रमेश ने पूछा "आपको पसंद आया दीदी ? उसका लंड पकड़ कर मैं बोली "यह तो बहुत प्यारा है. किसी भी लड़की को चोद कर मस्त कर देगा ". मैं चित्त होकर चूतड के बल लेटी थी और अपनी टांगे फैला कर बोली "ले अपनी दीदी की चूत को प्यार कर. जी भर के पियो. पूरी रात पियो. रमेश मेरी चूत को जीभ से चाटने लगा. वो मेरी चूत को पूरी अंदर तक चाट रहा था, कभी कभी उसकी जीभ मेरी चूत के मटर -दाने को भी चाट लेता था या फिर अपने दांतों में लेकर धीरे धीरे से काट लेता था.

अपनी चूत चटाई से मैं बिल्कुल पागल हो गयी और बड़बड़ाने लगी "आ आ आह हह हह मेरे राजा भैया, बहुत मजा आ रहा है. चूसो, खूब जोर से चूसो ओ ऊ ओ ओऊ ओऊ ओह हह उ ऊह. मैं उसका सर पकड़ कर उसके मुंह में अपनी चूत को चूतड उछाल उछाल कर रगड़ रही थी. उसकी चूत चटाई से बिल्कुल पागल हो गयी और रमेश के मुंह पर ही झड़ गयी.

रमेश हमारी चूत से निकला पूरा का पूरा पानी पी गया. मैं अभी भी बडबडा रही थी, "ओह रमेश अब अपनी दीदी को चोद दे. अब नहीं रुका जा रहा. अपने लंड को मेरे चूत में घुसा दे. पेल दे अपने लंड को मेरी चूत में. प्लीज़ राजा, अब चोदो ना. रमेश मेरी टांगों के बीच आ गया और अपने लंड का सुपारा मेरी चूत के मुंह पे रख कर धक्का लगाने लगा, लेकिन उसका लंड फिसल रहा था.

मैं हंस पड़ी और बोली "साले अनाड़ी बहनचोद, चोदना आता नहीं, चला है दीदी को छोड़ने बहिनचोद कहीं का"

मैने उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर लगा दिया और बोली चल अब देर ना कर और अपनी दीदी को चोद चोद कर उसकी चूत की आग को ठंडा कर. चल मेरे भैया अब लगा धक्का, और उसके चूतड को अपने हाथ से खूब जोर से दबा दिया और अपने चूतड को उछाल कर रमेश का लंड अपनी चूत में ले लिया. रमेश का लंड पूरा का पूरा मेरी चूत में घुस गया. मै मस्ती में आकर चिल्ला पड़ी आ आ आह ह हह ओ ओ ऊ ह हह हहा आ आ. हाय रमेश, बहुत अच्छे. पेलो मेरी चूत को, जोर से पेलो. फाड़ दो मेरी चूत रानी को, आज सालों बाद इतनी हसींन चुदाई हो रही है इस छिनाल चूत रानी की. साली को लंड लेने का बहुत शौक था. चोद दो, फाड़ दो आ अ आ आह ह हह. उ ऊ उई ईई में ई ईएर ररर ई मम म माँ आया आ यी यी ममा अर्रो ऊऊ धक् कक्क के ईई ज्जोर र से ई ई मम ममेरे ल न न ड ड वाल्ले ".

रमेश का लंड बहुत मोटा था और वो मेरी चूत को दो फांको में फाड़ रहा था. रमेश के लंड से चुदवा के मै बिल्कुल सातवें असमान पर थी. मै अपनी टांगों को उठा कर रमेश के चूतड पर लाक कर दिया और उसके कंधों को पकड़ कर उसके लण्ड के धक्कों को अपनी चूत में खाने लगी। रमेश अपने धक्कों के साथ साथ मेरी चूची को भी पी रहा था। मेरा पूरा बदन रमेश की चुदाई से जल रहा था औए मैं अपने चूतड़ उछाल उछाल कर उसका लण्ड अपनी चूत से खा रही थी।

मैं लण्ड खा कर पूरी तरह से मस्ता गई और बोली- रमेश ! आज पूरी रात तू इसी तरह मुझे चोदता जा। तू बहुत अच्छी तरह से चोद रहा है। तेरी चुदाई से मैं और मेरी चूत बहुत खुश हैं। मुझे नहीं मालूम था कि तू इतना अच्छा और मस्ती से चोदता है।

रमेश बोल रहा था कि हाय दीदी ! मैं आज पूरी रात तुमको इसी तरह चोदूंगा। तुम्हारी चूत बहुत अच्छी है, इसमें बहुत मस्ती भरी हुई है। अब यह चूत मेरी है और इसको खूब चोदूंगा। मैं मस्ती से पागल हो रही थी और मेरी चूत पानी छोड़ने वाली थी। रमेश अब जोर जोर से मेरी चूत चोद रहा था। वो अब अपना लण्ड मेरी चूत से निकाल कर पूरा का पूरा मेरी चूत में जोरों से पेल रहा था। मेरी चूत अब तक दो बार पानी छोड़ चुकी थी। मैं उसके हर धक्के का आनन्द उठा रही थी। हम दोनो अब तक पसीने से नहा गए थे।

रमेश अब अपनी पूरी ताकत के साथ मुझ्र चोद रहा था और मैं सोच रही थी कि काश आज की रात कभी खत्म ना हो। थोड़ी देर बाद रमेश चिल्लाया कि हय दीदी अब मेरा लण्ड पानी छोड़ने वाला है, अब तुम अपनी चूत से मेरे लण्ड को कस के पकड़ो। इतना कहने के बाद रमेश ने करीब दस बारह धक्के और लगाये और वो मेरी चूत के अन्दर झड़ गया और मेरी चूचियों पर मुंह रख कर सो गया।

उसके लण्ड ने बहुत सा पानी छोड़ा था और अब वो मेरी चूत से बाहर आ रहा था। मैंने रमेश को कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसका मुंह चूमने लगी और मेरी चूत ने तीसरी बार पानी छोड़ दिया।

थोड़ी देर बाद हम दोनो उठकर बाथरूम गए और अपनी चूत और लौड़े को साफ़ किया। रमेश का लण्ड अभी तक सख्त था। मैं उसका लण्ड हाथ में ले कर सहलाने लगी और फ़िर उसके सुपारे पर चुम्मा दे दिया। फ़िर हम दोनो नंगे ही बिस्तर पर जाकर सो गए औए एक दूसरे के लण्ड और चूत से खेलते रहे। थोड़ी देर बाद रमेश का लण्ड फ़िर से खड़ा होने लगा। उसे देख कर मैं फ़िर से मस्ती में आ गई। मैंने उसके लण्ड का सुपारा खोल दिया। उस समय उसका सुपारा बहुत फ़ूला हुआ था और चमक रहा था। मैंने झुक कर उसको अपने मुंह में ले लिया और मस्ती से चूसना शुरू कर दिया।

कुछ देर बाद रमेश बोला- दीदी! अब मेरा लण्ड छोड़ दो, नहीं तो मेरा पानी निकल जायेगा। मैं उससे एक बार और चुदाना चाहती थी इसलिए मैंने उसका लण्ड अपने मुंह से निकाल दिया और बोली- भाई ! अब तेरा लण्ड अच्छी तरह से खड़ा हो गया है और मेरी चूत में घुसने को तैयार है। चल जल्दी से मेरे ऊपर आ और मेरी प्यासी चूत को अच्छी तरह से चोद दे। यह सुनते ही रमेश मेरे ऊपर आ गया और अपना पूरा का पूरा लण्ड मेरी चूत में एक झटके में ही पेल दिया। फ़िर उसने मेरी चूत को खूब अच्छी तरह से चोदा और मैं उसकी चुदाई से निहाल हो गई। उस रात हम दोनो नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर सो गए। उस दिन के बाद से मैं और रमेश जब भी घर में अकेले होते हैं तो हम कपड़े नहीं पहनते रहे और खूब जम कर चुदाई करते हैं।